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	<title>कवि दिनेश रघुवंशी :: गीत ::</title>
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	<description>Welcome to the world of Kavi Dinesh Raghuvanshi</description>
	<lastBuildDate>Tue, 11 Nov 2008 14:38:09 +0000</lastBuildDate>
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		<title>गीत तुम्हारे</title>
		<description>Listen this geet Listen

गीत तुम्हारे तुमको सौंप सकूँ शायद
बस्ती-बस्ती गीत लिए फिरता हूँ मैं
प्यार की उन नन्हीं-नन्हीं सी राहों ने
पर्वत जैसी ऊँचाई दे डाली है
लेकिन सच्चाई ये किसको बतलाऊँ
शिखरों पर आकर मन कितना ख़ाली है
खुद से हार गया पर सब की नज़रों में
हर बाज़ी में जीत लिए फिरता हूँ मैं
तुम्हें ...</description>
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		<title>सिर्फ़ अकेले चलने का मन है</title>
		<description>Listen this geet listen

रिश्ते कई बार बेड़ी बन जाते हैं
प्रशनचिह्न बन राहों में तन जाते हैं
ऐसा नहीं किसी से कोई अनबन है
कुछ दिन सिर्फ़ अकेले चलने का मन है
तनहा चलना रास नहीं आता लेकिन
कभी-कभी तनहा भी चलना अच्छा है
जिसको शीतल छाँव जलाती हो पल-पल
कड़ी धुप में उसका जलना अच्छा है
अपना ...</description>
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		<title>साथ सब ना चल सकेंगे</title>
		<description>Listen this geet Listen

साथ सब न चल सकेंगे,ये तो हम भी जानते हैं
लोग रास्ते में रुकेंगे, ये तो हम भी जानते हैं
दूसरों के आँसू अपनी, आँख से जो भी बहाये
वो हमारे साथ आए, भीड़ चाहे लौट जए
साथ सब ना चल सकेंगे…
दूसरों को जानते हैं, खुद को पहचाना नहीं है
बात है ...</description>
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		<title>अनकहा इससे अधिक है</title>
		<description>तुम अधूरी बात सुनकर चल दिए-
जो सुना तुमने अभी तक, अनसुना इससे अधिक है
जो कहा मैंने अभी तक, अनकहा इससे अधिक है
मैं तुम्हारी और अपनी ही कहानी लिख रहा था
वक़्त ने जो की थी मुझपे मेहरबानी लिख रहा था
पत्र मेरा अन्त तक पढ़ते तो ये मालूम होता
मैं तुम्हारे नाम अपनी ...</description>
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	<item>
		<title>तुम्हारे शहर से जाने का मन है</title>
		<description>तुम्हारे शहर से जाने का मन है
यहाँ कोई भी तो अपना नहीं है
महक थी अपनी साँसों में,परों में हौसला भी था
तुम्हारे शहर में आये तो हम कुछ ख्वाब लाये थे
जमीं पर दूर तक बिखरे – जले पंखो ! तुम्हीं बोलो
मिलाकर इत्र में भी मित्र कुछ तेजाब ले आये
बड़ा दिल रखते ...</description>
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		<title>इक लड़की</title>
		<description>Listen this geet Listen

इक लड़की भोली-भाली सी
महके फूलों की डोली – सी
निश्छल, निर्मल, चंचल धारा
जैसे तोड़ के चले किनारा 
नेह के अमरित कलश से मेरी 
जीवन बगिया को सींचे
 जिसके पीछे दुनिया पागल 
वो पागल मेरे पीछे…
वो दुनिया का गणित न जाने 
सबकी बातें सच्ची माने
जागी आँखों में कुछ सपने
उसको ...</description>
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		<title>है नहीं तो बस वो नहीं…</title>
		<description>Listen this geet Listen

है वही घर, वो ही चीज़ें
वो ही शब, वो ही सहर
है नहीं तो बस वो नहीं
जिससे घर लगता था घर
हमसे ये दीवार, आँगन कोई बोलेगा नहीं
चाँद-सा चेहरा कभी अब द्वार खोलेगा नहीं
मेघ जब बरसा करेंगे
हम बहुत तरसा करेंगे
अब तो हर इक मोड़ पर
है नहीं तो बस वो ...</description>
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		<title>तुमसे मिलकर</title>
		<description>तुमसे मिलकर जीने की चाहत जागी
प्यार तुम्हारा पाकर ख़द से प्यार हुआ
तुम औरों से कब हो,तुमने पल भर में
मन के सन्नाटों का मतलब जान लिया
जितना मैं अब तक ख़द से अन्जान रहा
तुमने वो सब पल भर में पहचान लिया
मुझपर भी कोई अपना ह्क़ रखता है
यह अहसास मुझे भी पहली बार ...</description>
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		<title>चुप्पियाँ बोलीं</title>
		<description>Listen this geet Listen

मछलियाँ बोलीं-
हमारे भाग्य में
ढ़ेर- सा है जल, तो तड़पन भी बहुत हैं
शाप है य कोई वरदान है
यह समझ पाना कहाँ आसान है
एक पल ढ़ेरों ख़ुशी ले आएगा
एक पल में ज़िन्दगी वीरान है
लड़कियाँ बोलीं-
हमारे भाग्य में
पर हैं उड़ने को, तो बंधन भी बहुत हैं…
भोली-भाली मुस्कुराहट अब कहाँ
वे रुपहली-सी ...</description>
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	<item>
		<title>काग़ज़ पर उतर गई पीड़ा</title>
		<description>Listen this geet Listen

पहले मन में पीड़ा जागी
फिर भाव जगे मन-आँगन में
जब आँगन छोटा लगा उसे
कुछ ऐसे सँवर गई पीड़ा
क़ागज़ पर उतर गई पीड़ा…
जाने-पहचाने चेहरों ने
जब बिना दोष उजियारों का
रिश्ता अँधियारों से जोड़ा
जब क़समें खानेवालों ने
अपना बतलाने वालों ने
दिल क दरपन पल-पल तोड़ा
टूटे दिल को समझाने को
मुश्किल में साथ निभाने ...</description>
		<link>http://dineshraghuvanshi.com/kavi/blog/2008/10/10/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a5%9a%e0%a5%9b-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%88-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a5%9c%e0%a4%be/</link>
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